Friday, January 25, 2019

弃婴箱:试图拯救新生命的争议举措

在美国印第安纳州一间消防局的外面有一个专用箱,看上去很像一个普通的邮箱,打开箱盖向里看,里面有足够的空间可以存放中型大小的邮包。

但这里不是寄送包裹的设施,而是提供给人们存放初生婴儿。

印地安纳州去年12月安装了第七个弃婴箱,这些箱为有紧急需要的母亲提供服务。

但是这些箱子看似简单,其实很复杂。箱体内都配备了温度调节系统和感应器。当有婴儿存放在内,箱子会无声地发出警报,提醒紧急部门需要在5分钟之内,把被遗弃的婴儿救起。

在倡议团体“婴儿箱安全港(Safe Haven Baby Boxes)”工作的普丽西拉‧普鲁伊特(Priscilla Pruitt)说,“这是最后的一步。”该组织推动全国设立这些弃婴箱,认为很多年轻的母亲担心独自生育,无法自行养育婴儿,这项措施可以打击杀婴的行为。

“弃婴是一个问题,”她说,“许多年轻女子不想被人发现和见到,特别是在一些小镇,大家都互相认识。”

但不是每个人都认为这些箱是一个好提议。

父亲权益组织表示反对,认为措施导致只有母亲才可以作出决定。联合国也反对全球其他地方使用弃婴箱,呼吁国家提供更多家庭计划及各类支援,应该针对解决赤贫等弃婴问题的根源。

美国2016年开始设立弃婴箱,但这个概念并不新鲜。

早在中世纪时期,一些医院、教堂、孤儿院外,会使用一些圆桶收集弃婴。

过去20年,这些弃婴箱也引发了一些社会变化,在巴基斯坦、马来西亚、德国、瑞士也能找到它们的踪影。

在很多情况下,弃婴箱是由慈善机构提供。“婴儿箱安全港”组织表示,正准备增设20多个弃婴箱,并希望筹款制造100个弃婴箱,资金主要来自一个天主教兄弟会志愿者组织哥伦布骑士

美国个别州立法容许设置这些弃婴箱,在印第安那州有7个、俄亥俄州有2个、宾夕法尼亚州则准备设立首个弃婴箱。

新泽西州正在准备审议相关法案,但并未通过,乔治亚州则在有倡议活动。

去年12月时,密西根州议会曾经通过法案,但州长很快就撤回法案,密西根州州长里克‧斯奈德斯(Rick Snyder)撰写的信件表示,目前州内的法例让母亲可以在不记名的情况下,把婴儿给予当局,已经足够。

“容许父母可以如此简单地把婴儿放在箱内,我不同意这是恰当的做法。他们应该亲自把婴儿交予警方、消防人员或医院,”他说。

甚么是《安全港法》(safe haven law)?
在美国弃婴是违法的,但《安全港法》能够把这个行为去刑事化,就是要在婴儿出生最初几天,便把婴儿交到安全的地方。

1999年,德州最先通过法例,之后全部49个州也跟进。

德州的家庭及保护服务局说,根据自法例通过之后2004年开始做的统计,已有131个婴儿透过法例被交予当局。

专家说很难分析这些数字,也很难获悉这些婴儿最后的命运,有一些可能已经离世,被领养,或是仍被当局照看。

弃婴箱能够拯救生命吗?
丹麦一些政客提出有意设立弃婴箱,该国的福利研究中心Vive正研究这些弃婴箱在欧州的效果。

“德国自2000年设立这些婴儿箱,但没有统计在外遗弃婴儿的死亡数字是否有所下跌,”《哥根哈根邮报》引述Vive首席分析师玛丽‧雅各布森(Marie Jakobsen)说。

美国的“婴儿箱安全港”说,使用率证明了这些弃婴箱的价值。婴儿箱从2016年4月起,使用率提升两倍。该组织说如果没有这些箱子,这些婴儿难以活下去。

加州圣塔克拉拉大学法律系教授米歇尔‧奥伯森(Michelle Oberson)表示,很难说这些弃婴箱是一个坏建议,但似乎有点儿误导。她是专门研究青少年、怀孕、母亲议题的法律及道德议题的专家。

“如果要把婴儿遗弃在垃圾箱,《安全港法》无疑是最坏选择中的可行选择。我们设立领养计划是有众多原因,而我们有很多咨询。”

她说最主要的问题是这些措施,不一定能针对目标。许多年轻怀孕妇女出于恐惧和羞耻感,拒绝承认或隐瞒自己怀孕,结果突然要自行把孩子生下来。

“对于一个女生在自己的洗手间里诞下婴儿,我很难想象她会知道这条法例,然后坐公车或Uber去把婴儿交出去。”

“婴儿箱安全港”说,他们团队正与学校及青年组织合作,提高人们的意识。该组织还设立24小时热线为女性提供辅导及咨询工作。

“我们尝试帮助那些女子,不要随便遗弃自己的婴儿。我们不到最后,也不会告诉她们有关弃婴箱的事情,”普鲁伊特说。组织还设立系统,让女性找到更多相关资料。

该组织创办人莫妮卡‧凯尔西(Monica Kelsey)本人也是一名弃婴,她的母亲17岁时被强奸。凯尔西说,这个经历推动了她成为反堕胎倡议者,并提倡设立弃婴箱。

Thursday, January 24, 2019

कंगना रनौत 'मणिकर्णिका-झाँसी की रानी' से पहले कौन-सी हीरोइन डायरेक्टर भी रहीं?

रानी लक्ष्मीबाई पर बनी नई फ़िल्म 'मणिकर्णिका-झाँसी की रानी' में कंगना रनौत का नाम सह निर्देशक के तौर पर दिया गया है.

50 और 60 के दशक में राज कपूर, देव आनंद और दिलीप कुमार की त्रिमूर्ति ऐसी थी कि लाखों लोग इनकी एक्टिंग के दीवाने थे. लेकिन, राज कपूर अपनी फ़िल्में निर्देशित भी किया करते थे.

गुरु दत्त, देव आनंद और किशोर कुमार भी अभिनेता होने के साथ-साथ निर्देशक थे.

तो क्या ऐसी अभिनेत्रियाँ भी रही हैं जिन्होंने अभिनय के साथ-साथ निर्देशन में भी उतना ही नाम कमाया हो. ख़ुद को निर्देशित किया हो जैसा राज कपूर, किशोर कुमार, गुरु दत्त या देव आनंद करते थे.

फ़्लैशबैक में जाएँ तो ज़हन में आती हैं फ़ातिमा बेगम जिन्हें हिंदी सिनेमा की पहली महिला फ़िल्म निर्देशक भी कहा जाता है. 1926 में उन्होंने फ़िल्म 'बुलबुल ए परिस्तान' का निर्देशन किया था.

वो साइलेंट फ़िल्मों का दौर था और अकसर मर्द ही हीरोइन का रोल भी कर लिया करते. लेकिन 1922 में फ़ातिमा ने 'वीर अभिमन्यु' नाम की फ़िल्म में बतौर हीरोइन काम किया.

चंद साल के अंदर-अंदर वो फ़िल्म लिखने, निर्देशित करने लगीं और अपना बैनर भी बनाया. उस ज़माने के हिसाब से वो बड़ी बात थी. वो अकसर फैंटसी फ़िल्में बनातीं और फ़ोटोग्राफ़ी का ऐसा इस्तेमाल करती कि वो स्पेशल इफ़ेक्ट की तरह लगता.

फ़ातिमा बेगम कोहिनूर और इंपीरियल स्टूडियो की बड़ी फ़िल्मों में बतौर हीरोइन काम करती रहीं और साथ ही अपने बैनर तले हीर रांझा, शकुंतला जैसी फ़िल्में निर्देशित करती रहीं.

इसी तरह शोभना समर्थ 40 के दशक की बड़ी स्टार थीं- नूतन और तनुजा की माँ और काजोल की नानी.

भरत मिलाप, राम राज्य जैसी फ़िल्मों में सीता के रोल में वो इतनी मशहूर थीं कि कैलेंडर पर उनकी फ़ोटो बतौर सीता छपती थी, फ़िल्म में जब वो आतीं तो लोग श्रद्धा में फूल बरसाने लगते.

जब बेटियों नूतन और तनुजा को लॉन्च करने की बारी आई तो शोभना ने ख़ुद निर्देशन और निर्माण की कमान संभाली.

अकसर बड़े अभिनेता अपने बेटों को लॉन्च करते हैं लेकिन यहाँ शोभना समर्थ ने ख़ुद फ़िल्म बनाकर दोनों बेटियों का करियर शुरू किया. हमारी बेटी (1950) में नूतन और तनुजा को लॉन्च किया. छबीली (1960) की निर्देशक भी वही थीं.

30 और 40 के दशक में अशोक कुमार के साथ कंगन, बंधन और झूला जैसी फ़िल्में करने वालीं और लक्स साबुन के लिए पहली भारतीय महिला मॉडल बनने वाली लीला चिटनिस ने भी 1955 में 'आज की बात' का निर्देशन किया.

40 के दशक में फ़िल्मों में बतौर हीरोइन काम करने वाली प्रोतिमा दासगुप्ता ने कुछ फ़िल्में निर्देशित कीं. लेकिन, कहते हैं कि 1948 में उनकी बनाई फ़िल्म 'झरना' देखने के बाद तब बॉम्बे प्रेसिडेंसी के मुख्यमंत्री मोरारजी देसाई ने इस पर बैन लगा दिया था क्योंकि उनके हिसाब से ये फ़िल्म बहुत ही उत्तेजक थी.

आने वाले सालों में साईं परांजपई, कल्पना लाजमी जैसी महिला निर्देशक थीं लेकिन किसी बड़ी अभिनेत्री का अभिनय करते हुए निर्देशन भी करने का ट्रेंड अब भी धीमा ही था.

इसी बीच बंगाल में 1961 में सत्यजीत रे के निर्देशन में अभिनेत्री अपर्णा सेन ने 'तीन कन्या' में काम किया. अपर्णा ने जल्द ही बतौर अभिनेत्री अपनी जगह बना ली और कई अवॉर्ड जीते. 1981 में '36 चौरंगी लेन' बनाकर वो उन चंद अभिनेत्रियों की लिस्ट भी शामिल हो गईं, जो निर्देशक भी थीं.

2010 में अपर्णा सेन ने फ़िल्म 'इति मृणालिनी' को न सिर्फ़ निर्देशित किया बल्कि अपनी बेटी कोंकणा के साथ फ़िल्म में काम भी किया. इससे पहले 2002 में उन्होंने 'मिस्टर एंड मिसीज़ अय्यर' में भी कोंकणा को निर्देशित किया था.

अभिनेत्री हेमा मालिनी ने 90 के दशक में दिव्या भारती और शाहरुख़ ख़ान को ब्रेक दिया और 'दिल आशना' का निर्देशन किया. पर ख़ुद अपनी फ़िल्म में काम नहीं किया.

2002 में रेवती की फ़िल्म 'मित्र-माई फ़्रैंड' को कौन भूल सकता है जिसमें रेवती ने अभिनय भी किया और निर्देशन भी. ये फ़िल्म ऑल-वुमन क्रू के लिए भी काफ़ी मशहूर हुई थी.

Thursday, January 17, 2019

国办:选定11城试点国家组织药品集中采购和使用

《方案》提出目标任务,选择北京、天津、上海、重庆和沈阳、大连、厦门、广州、深圳、成都、西安11个城市,从通过质量和疗效一致性评价(含按化学药品新注册分类批准上市,简称一致性评价,下同)的仿制药对应的通用名药品中遴选试点品种,国家组织药品集中采购和使用试点,实现药价明显降低,减轻患者药费负担;降低企业交易成本,净化流通环境,改善行业生态;引导医疗机构规范用药,支持公立医院改革;探索完善药品集中采购机制和以市场为主导的药品价格形成机制。

  《方案》明确集中采购范围及形式:

  参加企业。经国家药品监督管理部门批准、在中国大陆地区上市的集中采购范围内药品的生产企业(进口药品全国总代理视为生产企业),均可参加。

  药品范围。从通过一致性评价的仿制药对应的通用名药品中遴选试点品种。

  入围标准。包括质量入围标准和供应入围标准。质量入围标准主要考虑药品临床疗效、不良反应、批次稳定性等,原则上以通过一致性评价为依据。供应入围标准主要考虑企业的生产能力、供应稳定性等,能够确保供应试点地区采购量的企业可以入围。入围标准的具体指标由联合采购办公室负责拟定。

  集中采购形式。根据每种药品入围的生产企业数量分别采取相应的集中采购方式:入围生产企业在3家及以上的,采取招标采购的方式;入围生产企业为2家的,采取议价采购的方式;入围生产企业只有1家的,采取谈判采购的方式。

《方案》提出,在试点地区公立医疗机构报送的采购量基础上,按照试点地区所有公立医疗机构年度药品总用量的60%—70%估算采购总量,进行带量采购,量价挂钩、以量换价,形成药品集中采购价格,试点城市公立医疗机构或其代表根据上述采购价格与生产企业签订带量购销合同。剩余用量,各公立医疗机构仍可采购省级药品集中采购的其他价格适宜的挂网品种。

  《方案》明确,通过招标、议价、谈判等不同形式确定的集中采购品种,试点地区公立医疗机构应优先使用,确保1年内完成合同用量。

  《方案》要求严格执行质量入围标准和供应入围标准,有效防止不顾质量的唯低价中标,加强对中选药品生产、流通、使用的全链条质量监管。在此前提下,建立对入围企业产品质量和供应能力的调查、评估、考核、监测体系。生产企业自主选定有配送能力、信誉度好的经营企业配送集中采购品种,并按照购销合同建立生产企业应急储备、库存和停产报告制度。出现不按合同供货、不能保障质量和供应等情况时,要相应采取赔偿、惩戒、退出、备选和应急保障措施,确保药品质量和供应。

  《方案》强调,医疗机构作为药款结算第一责任人,应按合同规定与企业及时结算,降低企业交易成本。严查医疗机构不按时结算药款问题。医保基金在总额预算的基础上,按不低于采购金额的30%提前预付给医疗机构。有条件的城市可试点医保直接结算。

中新网1月17日电 商务部新闻发言人高峰今天表示,近期一些国家散布所谓的中国科技产品威胁、存在安全风险的论调,是对中国企业和产品捕风捉影、毫无根据的无端指责。中国希望通过正常的国际贸易,让科技发展的成果全球共享,增进世界各国人民的福祉。

Tuesday, January 8, 2019

बीजेपी नेता ने मंदिर परिसर में लंच पैकेट के साथ बंटवाई शराब

इस मामले में नरेश अग्रवाल और नितिन अग्रवाल कुछ भी कहने से बच रहे हैं लेकिन हरदोई से ही बीजेपी सांसद अंशुल वर्मा ने इस पर गहरा ऐतराज़ जताते हुए पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र नाथ पांडेय और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को पत्र लिखा है.

ये मामला रविवार का है जब शहर के प्राचीन श्रवण देवी मंदिर परिसर में पासी समाज का सम्मलेन आयोजित किया गया था. सम्मेलन का आयोजन हरदोई सदर से विधायक नितिन अग्रवाल ने किया था.

इस सम्मलेन में पूर्व राज्यसभा सदस्य नरेश अग्रवाल भी मौजूद थे. बताया जा रहा है कि इसी कार्यक्रम में लोगों के बीच बांटे गए लंच पैकेटों में पूड़ी के साथ शराब की शीशी भी थी.

शराब की बोतल के साथ लंच पैकेट्स के न सिर्फ़ वीडियो वायरल हुए हैं बल्कि पूड़ियां खाते और शराब पीते हुए लोगों के वीडियो भी सामने आए हैं. यही नहीं, ये पैकेट्स कार्यक्रम में मौजूद बच्चों को भी दिए गए थे और बच्चे भी शराब की बोतल लिए वीडियो में दिख रहे हैं.

घटना से तिलमिलाए स्थानीय सांसद अंशुल वर्मा ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र नाथ पांडेय को शिकायती पत्र लिखा है.

पत्र में स्पष्ट रूप से लिखा गया है, "6 जनवरी 2019 को मेरे संसदीय क्षेत्र (लोकसभा) हरदोई के प्राचीन धार्मिक स्थल श्रवण देवी मंदिर में बीजेपी नेता नरेश अग्रवाल द्वारा आयोजित पासी सम्मेलन के दौरान उपस्थित क्षेत्रवासियों को नाबालिग़ बच्चों के बीच लंच पैकट में शराब की शीशी का वितरण किया है. यह अत्यंत दुखद है कि जिस संस्कृति की हमारी पार्टी दुहाई देती है. हमारे नवआगंतुक सदस्य नरेश अग्रवाल उस संस्कृति को भूल गए हैं."

बीबीसी से बातचीत में अंशुल वर्मा ने कहा कि यदि पार्टी उनके ख़िलाफ़ कोई क़दम नहीं उठाती है तो वो और उनके पासी समाज के लोग इसके ख़िलाफ़ सड़कों पर उतरेंगे.

अंशुल वर्मा बोले, "नरेश अग्रवाल ने हमारे पासी समाज का उपहास करते हुए जनपद के प्रख्यात शक्तिपीठ में शराब बांटने जैसा निंदनीय कार्य किया है. यदि इस प्रकार की पार्टी विरोधी गतिविधियों को पार्टी द्वारा गंभीरता से नहीं लिया गया तो अपने समाज के हित में हम सड़कों पर भी उतरेंगे."

पत्र में अंशुल वर्मा ने सरकार से मांग की है कि इस मामले में प्रशासनिक अधिकारियों की लापरवाही का भी संज्ञान लिया जाए और यदि उनकी लापरवाही साबित होती है तो उनके ख़िलाफ़ भी कठोर विभागीय कार्रवाई की जाए.

बताया जा रहा है कि कार्यक्रम के बाद नरेश अग्रवाल और उनके बेटे हरदोई से बाहर चले गए. बीबीसी ने इस मामले में उन दोनों की प्रतिक्रिया जानने की कोशिश की लेकिन दोनों ने ही इस पर कोई बात करने से मना कर दिया.

वीडियो से पता चलता है कि कार्यक्रम में आए लोगों को लंच पैकेट बांटने का निर्देश ख़ुद नरेश अग्रवाल और उनके बेटे दे रहे हैं.

भारतीय जनता पार्टी ने फ़िलहाल मामले में कोई कार्रवाई नहीं की है लेकिन बताया जा रहा है कि पार्टी की राज्य इकाई ने इसे बहुत ही गंभीरता से लिया है.

राज्य बीजेपी के प्रवक्ता राकेश त्रिपाठी ने बीबीसी से कहा, "माननीय सांसद अंशुल वर्मा की शिकायत और पार्टी अध्यक्ष को लिखा गया पत्र संज्ञान में आया है. इस तरह की गतिविधि में जो भी लिप्त पाया जाएगा, निश्चित तौर पर उसके ख़िलाफ़ पार्टी कार्रवाई करेगी. भारतीय जनता पार्टी इस तरह की संस्कृति का समर्थन नहीं कर सकती."

बीजेपी के हरदोई ज़िलाध्यक्ष सौरभ मिश्र ने बीबीसी को बताया कि इस कार्यक्रम से बीजेपी का कोई लेना-देना नहीं है.

उन्होंने कहा, "जिस सम्मेलन में इस तरह के विवादित लंच पैकेट बांटने का मामला सामने आया है, वह सम्मेलन बीजेपी का कार्यक्रम नहीं था और न ही ऐसे किसी कार्यक्रम से बीजेपी का कोई लेना-देना है."

वहीं हरदोई के ज़िलाधिकारी पुलकित खरे का कहना है कि जातीय सम्मेलन के दौरान धार्मिक स्थल परिसर में शराब बांटने की शिकायत उन तक नहीं पहुंची है. यदि शिकायत मिलती है तो उसका संज्ञान अवश्य लिया जाएगा.

Tuesday, January 1, 2019

英国防大臣:可能在南海建军事基地,发挥全球作用

英国脱离欧洲后,放弃自1960年代撤出苏伊士运河以东地区的政策,才能成为“真正的全球角色”。但他受到保守党议员的批评,说他表现出“赤裸裸的野心”。

加文·威廉姆森接受《星期天电讯报》采访时说,英国脱离欧盟后英国人应该更乐观,“这是自二战结束以来最了不起的时刻,我们可能在世界舞台上扮演世界期望我们扮演的角色”。

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加文·威廉姆森说,他在寻找机会,“不仅在远东,而且也在加勒比地区”建立英国基地。不过他拒绝披露英国会建立新军事基地的具体地点

《星期天电讯报》引述接近国防部的消息人士说,新海外基地可能在几年后设在靠近南中国海的新加坡或文莱;在加勒比地区的基地可能在蒙特塞拉特(Montserrat) 或圭亚那。

加文·威廉姆森说,他期望脱离欧盟后英国会大幅度调整政策重点,英国要同澳大利亚,加拿大,新西兰,加勒比国家,以及非洲国家深化联系。他认为,这些国家期望英国发挥“道德领导,军事领导以及全球领导”作用。

英国国防大臣说,最近的研究显示,英国人低估了英国发挥全球影响力的潜力。他还说,研究表明,“在世界眼中,英国身高10英尺,但我们实际身高6英尺,英国人自视身高只有5英尺,而不是6英尺,当然更不是10英尺”。

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保守党后排议员安娜·苏布里(Anna Soubry)说,国防大臣的话 “完全是无稽之谈”,她说英国留在欧盟并不妨碍英国的国防政策。

《星期天电讯报》文章的读者评论中有人指出,欧盟并没有军事功能,因此脱欧和英国军事项目并没有关联。北约是英国参加的唯一军事联盟,所以如果英国希望并且有钱在世界各地建军事基地,和英国是否留在欧盟没有关系。

工党议员卢克·珀拉德(Luke Pollard )在社交媒体上质问国防大臣:预算从哪里来?为什么英国国家军事战略可以边走边改?要削减哪些方面的预算来支持上述扩充?